Mother’s day special- An Inspirational Story

Mother’s day special– An Inspirational Story

नमस्कार! मैं सूरज कुमार सिंह, गांव – चौहान डीह, पो+ थाना= खैरा, जिला – जमुई( बिहार) आपको यह आश्वस्त कराता हूं कि यह मेरे द्वारा लिखित पूर्णतया मौलिक रचना पर आधारित है। इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट वर्क नहीं किया गया है।

मां सभी के लिए बहुत ख़ास होती है। चाहे वो एक आम इंसान की मां हो या सेलिब्रिटी की, सभी की अपनी मां से जुड़ी अनगिनत यादें हैं। उन सभी अनगिनत यादों को एक ही दिन में समेटना बहुत ही नामुमकिन होता है। उन अनगिनत पलों के बदले हम अपनी जिंदगी से अपनी मां के लिए कुछ पल निकालें, शायद इसीलिए मई के दूसरे रविवार को हम मदर्स डे मनाते हैं। इस बार मदर्स डे 10 मई को है। इस मदर्स डे पर सभी अपनी मां से अपने तरीके से कुछ कहना चाहते हैं।

मैं भी इस पावन पुनीत अवसर पर अपनी एक याद आपसे साझा करने जा रहा हूं।
बहुत पुराने समय की बात है। जब मैं मात्र 12 साल का ही था। उस समय मेरे परिवार में मैं, मेरी एक बहन, पिताजी, दादाजी ओर दादी एक साथ रहा करते थे। उस साल बारिश नहीं हुई थी। अकाल पड़ा था ।दाने-दाने को लाले पड़े थे। हम लोगों के लिए बहुत कठिन समय था। दिन भर में एक समय भी खाना मिल जाए, तो बड़े सौभाग्य की बात होती थी पिताजी जंगलों से लकड़ियां काटना और उसे बेचना शुरू कर दिए। जिससे किसी तरह एक समय के भोजन का प्रबंध हो पाता था। एक दिन जब बाजार में लकड़िया नहीं बिकी, तो उस दिन घर का चूल्हा नहीं जल पाया। शाम में दादी कहीं पड़ोस से 1 किलो चावल ला कर दी; तो मां ने उसे बनाकर पूरे परिवार को खिलाया। मैंने मां से पूछा,”तुम खाई?” बोली – हां, खा लिए।” दूसरे दिन जब मैं उठा तो देखा कि बहुत देर हो चुका है, अभी तक मां नहीं उठी है। तो मैं उठाने गया, तो उसका तबियत कुछ गड़बड़ दिखाई दिया। वो कमजोरी की वजह से उठ नहीं पा रही थी। मैं उसे अस्पताल ले गया, डॉक्टर ने कहा – “इन्हें कुछ परेशानी नहीं है,
जांच से मालूम होता है, कि ये बहुत समय से भूखी है, जिसके वजह से कमजोरी लग रहा है। मैं अब सब कुछ समझ गया था। उन्हें घर लाकर अपने जो पुराने किताबें बची थी, उसे बेच दिया और उसके खाने का प्रबंध कर दिया। इसके बाद मैंने मां से पूछा,- “आपने इतना अपने-आप को क्यों कष्ट पहुंचाया?” बोली -” क्या करूं, तेरी मां हूं न। जो भोजन बनाई थी, उसमें सबको खिलाकर मेरे लिए नहीं बच पाया था , तो क्या करती??? अपने बेटे को भूखे सुलाती। इसलिए मैं सिर्फ पानी पीकर ही सो गई थी।
“इतना सुनते ही मेरे आंखों में अश्रु भर आए, मैं अपनी मां के बाहों से लिपटकर रोने लगा।
तब हमें ये एहसास हुआ कि मां कितनी करुणामय होती है। हमें ये दृश्य बार बार याद आती है। खुद भुखे रहकर भी अपने पुत्र को भोजन कराती है। एक मां के स्नेह का हृदय इतना विशाल होता है, कि इसमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड समा जाए। मां का आंचल में अपने पुत्र के प्रति सदा स्नेह की मोतियां विद्यमान रहती है। मां तो मां होती है, जिसके समान दूसरा और कोई नहीं। इसलिए मां को हमेशा सम्मान दें। उनकी आदर करें। हम ज़िन्दगी भर सेवा करके भी उनके ऋण नहीं चुका सकते। मां के चरणों में जन्नत का सुख मिल जाता है। ऐसी माता को मैं अपने हृदय के अंतिम बिंदु से कोटि – कोटि नमन। 

 

A Very Inspiring Story For Mother’s Day Special.

 

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2 thoughts on “Mother’s day special- An Inspirational Story

  • May 9, 2020 at 4:31 pm
    Permalink

    Maa
    Sunne, Bolne Me Jitna Aasan Lagta Hain Utna Aasan Hota Nahi… Maa Banana.
    Humara Kya … Hum to Kabhi Bhachpan me Shararat karte hain….Jawani me Aiyashi… Or jab tak hume ye samjh aata hai ki maa ko kitna kuchh sahna pada hai …tab tak der ho jati hai…
    Kabhi kabhi to bahoot der….Ki Chaah k bhi aap Na Apni Galtiyan Sudhar Sako Na …Use wo pyar de sako jiske liye uski aankhe na jane kab se aapko Nihar Rahi Hoti Hai…

    Reply
  • May 9, 2020 at 4:33 pm
    Permalink

    Maa
    Sunne, Bolne Me Jitna Aasan Lagta Hain Utna Aasan Hota Nahi… Maa Banana.
    Humara Kya … Hum to Kabhi Bhachpan me Shararat karte hain….Jawani me Aiyashi… Or jab tak hume ye samjh aata hai ki maa ko kitna kuchh sahna pada hai …tab tak der ho jati hai…
    Kabhi kabhi to bahoot der….Ki Chaah k bhi aap Na Apni Galtiyan Sudhar Sako Na …Use wo pyar de sako jiske liye uski aankhe na jane kab se aapko Nihar Rahi Hoti Hai…
    😑😑

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